शुद्ध बकैती
Blog of Mukund Madhav Mishra
Friday, 18 November 2011
आइना
एक आइना, कलम, दो सुफे लेकर बैठा
खुद को देखा, एक तस्वीर बनायीं
लगा सोचने,
तस्वीर देखकर
खूबसूरती मुझमे कहा से आई
कल
जिसके आंसू पोछे थे, अपने रेशमी रुमाल से
मेरे अक्स में मुसकुराती है, आज वोही बूढी माई
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