Friday, 18 November 2011

आइना


एक आइना, कलम, दो सुफे लेकर बैठा
खुद को देखा, एक तस्वीर बनायीं

लगा सोचने, तस्वीर देखकर 
खूबसूरती मुझमे कहा से आई 

कल जिसके आंसू पोछे थे, अपने रेशमी रुमाल से 
मेरे अक्स में मुसकुराती  है, आज वोही  बूढी माई 

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