Saturday, 31 December 2011

माँगने वाले और भी थे, खुदा से तुम्हे ही मांग लिया,
मैंने तो बस इतना माँगा था, तेरी दुआयें कुबूल हों |
तुम्हारी बेवफाई का नहीं, दोष दिया हाथ की लकीरों का,
तुमसे वो पहली मुलाक़ात, इन्ही की तो साज़िश थी |

Tuesday, 20 December 2011

तकिये की नर्मी, बिस्तर की सिलवटें,
आंखों की थकन सब खर्च हो गयी।
बीती रात कोई सपना नहीं देखा,
नींद फिर बेवजह् खर्च हो गयी।।

Wednesday, 7 December 2011

चांद

चाँद अब बादलों की ओट में छुपकर नहीं रहता 
कभी नुक्कड, कभी कूचे , कभी दफ़्तर मे आता है ,


दुआ उसको लगे जिसने दिया ये चाय का चस्का
वो शक्कर मांगने लेकर कटोरी घर मे आता है,


पलक उठते फ़िज़ा मे फ़ैलती हैं रौनके ऐसे
कोइ शादी शुदा जोडा नये कोहबर मे आता है,


ये वक़्तो के बडे  टेढ़े गणित के कायदे होते
कभी सदियों नहीं जाता, जो इक पल भर में आता है  ||

Friday, 2 December 2011

सोचता हूं

सोचता हूं,

सच के लिये लडता रहूं ,
या झूठ मे ही खो जाऊं

तुम सब् को बदल डालूं
य तुम सा ही हो जाऊं

गर सुबह होने वाली  है रात से भी काली
क्यूं ना सूरज के जागने से पेहले मै सो जाऊं