चलो तुम और मैं बैठें, कोई मेहफ़िल सजाते हैं
के कुछ बातें आजकल की, के कुछ किस्से पुराने हों
लिखो कोई दासतां ऐसी, परे तारीख के जो हो
नये जुग की कहानी के, सभी हिस्से पुराने हों
नयी सड्कें शहर की हैं, भटक जाऊं न मैं इनपे
चलो लेकर गांव मेरे, जहां रस्ते पुराने हों
मुझे जाते समय इक बात कह बैठा मकां मेरा
नये घर मे भले जाओ, मगर रिश्ते पुराने हों