एक अरसे से फर्श की धूल साफ़ नहीं की,
डरता हूं तेरे क़दमों के निशान मिट ना जाए
तारों की रोशनी धुंधली हो रही है
चाँद की गैरहाजिरी में आसमान मिट ना जाए
तुम थे तो जुनूं था मसीहा बनने का मुझे
इस तनहाई में मेरा इंसान मिट ना जाए
तुम आना तो थोड़ी ज़िंदगी लेकर आना
यहां मौत पसरी है, ये जहान मिट ना जाए