वो बेपरदा भी होते हैं तो तेह्जीब् होती है,
हमारा नज़रे तक उठाना फिर बेहयाई क्यूं है
कहते हैं इंसानियत में अल्लाह बसा करता है
हैवानियत के साथ खड़ी पूरी खुदाई क्यूं है
मैंने कसर न छोड़ी जिनका साथ निभाने में
हिस्से मेरे आती उनकी बेवफाई क्यूं है
झूठे और मक्कारों की जिस जहाँ में मौज होती है
ऐसे शहर में माधव तेरी, फितरत सच्चाई क्यूं है.
हमारा नज़रे तक उठाना फिर बेहयाई क्यूं है
कहते हैं इंसानियत में अल्लाह बसा करता है
हैवानियत के साथ खड़ी पूरी खुदाई क्यूं है
मैंने कसर न छोड़ी जिनका साथ निभाने में
हिस्से मेरे आती उनकी बेवफाई क्यूं है
झूठे और मक्कारों की जिस जहाँ में मौज होती है
ऐसे शहर में माधव तेरी, फितरत सच्चाई क्यूं है.
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