Blog of Mukund Madhav Mishra
अंधेरे में टिमटिमाता सा चराग़ तो है, मेरी हैसियत छोटी सही, बेदाग़ तो है। रखो तुम अपने ठंडे बल्बों की रोशनी को मेरे दिये में चमक कम सही, आग तो है।।
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